टेस्ट क्रिकेट का प्रारूप कैसे काम करता है
टेस्ट क्रिकेट में दोनों टीमें दो-दो पारियाँ खेलती हैं और मुकाबला पाँच दिनों तक चलता है। प्रत्येक दिन तीन सत्र होते हैं — सुबह, दोपहर और शाम — और हर सत्र में 30 ओवर खेले जाते हैं। टॉस जीतने वाली टीम बल्लेबाजी या गेंदबाजी चुनती है, और पिच की स्थिति इस फैसले में अहम भूमिका निभाती है। मुंबई से बेंगलुरु तक भारतीय
क्रिकेट प्रेमी इस प्रारूप की गहराई को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं। फॉलो-ऑन का नियम, डिक्लेरेशन की रणनीति और ड्रॉ की संभावना — ये सब मिलकर टेस्ट को क्रिकेट का सबसे जटिल और बौद्धिक प्रारूप बनाते हैं।